जब विश्वास की डोर टूटती है,
तो उससे आवाज़ नहीं होती,
बड़ी कसमसाहट के साथ हर एक रेशा- रेशा , तार -तार , बारी -बारी अलग हो जाता है
बहुत कोशिश करने के बाद भी ये टूटे हुए टुकड़े नहीं जुड़ते
अगर कोशिश कर के जुड़ भी जाये,
तो , एक गाँठ रह जाती है
गाँठ जो बाटे नहीं बटती, तारे नहीं तरती, पाटे नहीं पटती,
रीस रीस कर वो कसती ही जाती है,
वक़्त का कोई मरहम नहीं चढ़ता है ,
कोई जतन नहीं फलता ,
कोई हल नहीं सुज़ता,
केवल सूखी रस्सी पर फ़ास की तरह
यह गाँठ रात दिन चुभती रहती है,
कितनी भी कोशिश कर ले कोई
अपनी रूह को भी हवाले कर दे कोई
पर एक गाँठ रह जाती है
एक
गाँठ रह जाती है
तो उससे आवाज़ नहीं होती,
बड़ी कसमसाहट के साथ हर एक रेशा- रेशा , तार -तार , बारी -बारी अलग हो जाता है
बहुत कोशिश करने के बाद भी ये टूटे हुए टुकड़े नहीं जुड़ते
अगर कोशिश कर के जुड़ भी जाये,
तो , एक गाँठ रह जाती है
गाँठ जो बाटे नहीं बटती, तारे नहीं तरती, पाटे नहीं पटती,
रीस रीस कर वो कसती ही जाती है,
वक़्त का कोई मरहम नहीं चढ़ता है ,
कोई जतन नहीं फलता ,
कोई हल नहीं सुज़ता,
केवल सूखी रस्सी पर फ़ास की तरह
यह गाँठ रात दिन चुभती रहती है,
कितनी भी कोशिश कर ले कोई
अपनी रूह को भी हवाले कर दे कोई
पर एक गाँठ रह जाती है
एक
गाँठ रह जाती है
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